शनिवार, 9 अक्तूबर 2010

नया क्या है ?

दिन, रात  
और फिर दिन

इस सिलसिले में 
नया क्या है ?

नया वह भी नहीं
जिसके बारे में
न्यूज़ चैनल बोल रहे हैं सुबह सुबह

नया यह है
कि आज चाय मैंने बनाई है
तुम्हारे लिए
और शायद यह भी
कि तुम सोती रही आज
मेरे उठने के बाद भी ! 

**   सुशील कुमार  **

2 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसा तो मेरे साथ कभी कभी हो ही जाता है,परत्नु आपने बहुत ही अच्छे तरह से इसे उकेरा है.पावेल परवेज़,पटना

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