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तश्वीर गूगल से साभार |
अपनी आगोश में दरिया
किसी को देर तक पनाह नहीं देता
ये फितरत ही है उसकी
कि आगोश में लेकर
साहिल के हवाले कर देता है एक रोज
शुक्र है कि उन दरियाई आँखों पर
कभी ऐतबार न हुआ मुझको . . .
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(सुशील कुमार)
जनवरी 27 , 2012
राजकोट, गुजरात
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